अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर के संचालन को और अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा को मंदिर का पहला मुख्य कार्यपालक अधिकारी यानी सीईओ नियुक्त किया है। करीब चार दशक तक भारतीय वायुसेना में सेवाएं दे चुके मिश्रा अब अयोध्या में मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था, संचालन, सुरक्षा और श्रद्धालुओं से जुड़ी सुविधाओं की जिम्मेदारी संभालेंगे। देवरिया के भोपतपुरा गांव से निकलकर वायुसेना के शीर्ष पदों तक पहुंचे मिश्रा के सामने अब राम मंदिर की विशाल व्यवस्थाओं को संभालने की चुनौती होगी।
कौन हैं एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा?
जीतेंद्र मिश्रा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के भाटपाररानी क्षेत्र स्थित भोपतपुरा गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना में लड़ाकू विमान के पायलट के रूप में अपना सैन्य करियर शुरू किया था। लगभग चार दशक लंबे करियर में उन्होंने वायुसेना की कई अहम जिम्मेदारियां संभालीं और विभिन्न तरह के 18 से ज्यादा विमानों पर उड़ान भरी।
मिश्रा के पास 3,000 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव है। लंबे सैन्य कार्यकाल के दौरान उन्होंने न सिर्फ परिचालन स्तर पर जिम्मेदारियां निभाईं, बल्कि नेतृत्व और बड़े संगठनों के प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण पदों पर भी काम किया।
वायुसेना में संभालीं कई बड़ी जिम्मेदारियां
एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना में कमांडिंग-इन-चीफ के पद पर भी रह चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने एकीकृत रक्षा स्टाफ में उप प्रमुख के रूप में सिद्धांत, संगठन और प्रशिक्षण से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली।
उनके सैन्य अनुभव का दायरा भारत तक ही सीमित नहीं रहा। उन्होंने अमेरिका और ब्रिटेन के प्रतिष्ठित रक्षा संस्थानों से भी प्रशिक्षण प्राप्त किया। अलग-अलग स्तरों पर नेतृत्व, रणनीतिक योजना, संगठन संचालन और कई इकाइयों के बीच तालमेल का अनुभव उनकी नई भूमिका के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ऑपरेशन सिंदूर में भी रही अहम भूमिका
मिश्रा का नाम ऑपरेशन सिंदूर के दौरान निभाई गई महत्वपूर्ण सैन्य भूमिका से भी जुड़ा रहा है। उनके सैन्य अनुभव में उच्च स्तर के परिचालन और रणनीतिक दायित्व शामिल रहे हैं। यही अनुभव अब राम मंदिर जैसे बड़े और संवेदनशील धार्मिक परिसर के संचालन में उनके लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
राम मंदिर के पहले सीईओ की जिम्मेदारी कितनी बड़ी?
राम मंदिर में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और लगातार विस्तार पा रही व्यवस्थाओं के बीच सीईओ का पद बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मंदिर प्रशासन को रोजाना बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं की आवाजाही, दर्शन व्यवस्था, सुरक्षा, कर्मचारियों के प्रबंधन और सुविधाओं के संचालन से लेकर अलग-अलग एजेंसियों के बीच समन्वय तक कई स्तरों पर काम करना होता है।
मंदिर परिसर और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं के विस्तार के साथ प्रशासनिक कामकाज भी लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में ट्रस्ट को ऐसे अधिकारी की जरूरत थी, जिसे बड़े संगठन को संचालित करने, टीमों के बीच समन्वय बनाने और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में तेजी से निर्णय लेने का अनुभव हो।
सैन्य अनुशासन अब संभालेगा मंदिर की व्यवस्था
वायुसेना में लंबे समय तक काम करने के दौरान मिश्रा ने जिस अनुशासन और नेतृत्व क्षमता का अनुभव हासिल किया, अब उसका इस्तेमाल राम मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था में किया जाएगा। उनकी भूमिका केवल कार्यालयी कामकाज तक सीमित नहीं होगी, बल्कि मंदिर के संचालन से जुड़ी विभिन्न व्यवस्थाओं को एक समन्वित ढांचे में आगे बढ़ाने की होगी।
श्रद्धालुओं की सुविधाओं को बेहतर करना, सुरक्षा व्यवस्था के साथ तालमेल, कर्मचारियों और संबंधित एजेंसियों का प्रबंधन तथा मंदिर की रोजमर्रा की संचालन व्यवस्था को सुचारु रखना उनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल होगा।
देवरिया के गांव से वायुसेना के शीर्ष पद तक का सफर
जीतेंद्र मिश्रा की नियुक्ति इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि उनका सफर उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के एक गांव से शुरू होकर भारतीय वायुसेना के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचा। लड़ाकू विमान के पायलट के तौर पर करियर शुरू करने के बाद उन्होंने अलग-अलग महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं और अब देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक के प्रशासन की कमान संभालने जा रहे हैं।
राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से उन्हें पहला सीईओ नियुक्त किए जाने के साथ मंदिर की व्यवस्थाओं को पेशेवर और व्यवस्थित तरीके से संचालित करने की दिशा में एक नई प्रशासनिक व्यवस्था की शुरुआत हुई है।
